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अभी तो बहुत से कार्य बाकी हैं #lastdayonearth

  क्या ? आज मेरे जीवनकाल का आखिरी दिन है ? नहीं नहीं प्रभु ऐसी शीघ्रता मत दिखाओ अभी तो बहुत से कार्य बाकी हैं नौकरी , बच्चों की ज़िम्मेदारी , परिवार की देखभाल , सब बाकी है कुछ दिलों में अपनेपन के एहसास जगाना बाकी है कुछ प्रियजनों को गले लगाना बाकी है तो कुछ से माफ़ी माँगना बाकी है अपने कटु शब्दों के लिए पश्चाताप के आंसू बहाना भी बाकी है नहीं नहीं प्रभु ऐसी शीघ्रता मत दिखाओ अभी तो बहुत से कार्य बाकी हैं सोचा था रोज़ाना प्रभु स्मृति में चंद मिनट ज़रूर बिताएंगे रोज़ाना एक अच्छी आदत अपनाएंगें रोज़ाना नहीं तो कभी कभी तो ज़रूर किसी रोते को हसांयेंगें पर ये क्या ? आज मेरे जीवनकाल का आखिरी दिन है ? नहीं नहीं प्रभु ऐसी शीघ्रता मत दिखाओ अभी तो बहुत से कार्य बाकी हैं हम किन झमेलों में उलझे रहे ? रोज़ाना बस दौड़ते ही रहे ‘समय नहीं है’  ऐसा बहाना अक्सर दोस्तों को लगाते गए  सुबह नौकरी पर पहुँचने की दौड़ तो शाम को घर वापसी की दौड़ कभी दोस्त की बड़ी गाड़ी से जलन , तो कभी अपना घर न होने की कसक अभी तो इस जलन व् कसक को मिटाना बाकी है प्रभु नहीं नहीं प्रभु ऐसी शीघ्रता मत दिखाओ अभी तो बहुत से कार्य बाक...

Book Review in hindi - 'मन मंथन '(काव्य संग्रह) #TheBlogchatter Ebook

मैं आज पुस्तक  ‘मन मंथन ‘ का review करने जा रही हूं ।  यह पुस्तक जिसका review किया जा रहा है , #The Blogchatter Ebook Carnival  का हिस्सा है ।  यह पुस्तक अमित  प्रकाश द्वारा लिखी गयी कविताओं का संग्रह है । हालांकि मेरी कविताओं  में कुछ ज़्यादा रुचि नही है पर दिल ने कहा चलो कुछ नया पढ़ते हैं । दूसरी बात यह कि मैं हिंदी में लिखना चाह रही थी तो सोचा कि सबसे पहले  किसी हिंदी पुस्तक का ही  review  किया जाये। भाग 1 के शुरू में ही  डॉक्टर अमित ने लिखा था कि जब मैंने अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोना चाहा तो फिर लौट न सका । यह ठीक उसी प्रकार है जैसे हम सब का ब्लॉगिंग की दुनिया मे कदम रखना , एक बार जो कदम रखा तो फिर लौटने का नही बल्कि आगे बढ़ते रहने का , कुछ नया सीखते रहने का मन करता है । भाग 3 ‘ वेदना ‘ ,  भाग 4  ‘अंतर्दर्शन’  और भाग 5  ‘तलाश’  के अंतर्गत लिखी कविताएं मन को काफी अच्छी लगीं जिसमे मुश्किल वक्त के दिल के भावों को दर्शाया गया है । जीवन की कठिनाइयों से मनुष्य को जूझना ही पड़ता है व उनसे मनुष्य कुछ न कुछ ज़रूर सीखता है । कवि ने उन कठिनाइयों ...