उसकी मुस्कान बहुत प्यारी है । जब भी वो घर आता है तो उसे देख मैं भी मुस्कुराये बिना नही रह पाती । पास ही के एक हिंदी मीडियम सरकारी स्कूल में आठवीं कक्षा का विद्यार्थी है । मोहल्ले की गलियों में साईकिल पर इधर उधर चक्कर काटता दिखता है शाम को । वह गली के नुक्कड़ पर बैठे कपड़े प्रेस करने वाले रवि भैया का बेटा है । सोहन नाम है उसका । सोहन सुबह स्कूल जाता है और शाम को अपने पिता के काम में हाथ बंटाता है । लोगों के घरों से कपड़े लेकर आना और फिर प्रेस किये हुए कपड़े वापिस देकर आना सोहन का काम है । कपड़ों की 2-3 गठरियां साईकिल के पीछे और 2-3 आगे साईकिल की टोकरी में । सोहन की माँ का पिछले साल गंभीर एक्सीडेंट हो गया था जिस वजह से वो अब घर का सारा काम संभालने में असमर्थ है । तो रवि भैया और सोहन ही मिलजुलकर सब काम करते हैं , चाहे खाना बनाना हो या अपनी छोटी सी प्रेस की दुकान संभालने का काम । सोहन को टीवी पर मूवीज देखना भी बेहद पसंद है । सोहन जब भी हमारे घर कपड़े लेने आता है तो उसकी नज़र सबसे पहले कमरे में पड़ी किताबों की तरफ जाती है । अगर घर पर टीवी चल रहा हो तो वह दूर से खड़े खड़े एकटक टीवी पर चल र...
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